पुराणकथेनुसार, सतीदेवीने देहत्याग केल्यानंतर भगवान शंकरांनी तिचा देह उचलून पृथ्वीवर भ्रमण केले.
तेव्हा भगवान विष्णूंनी सुदर्शन चक्राने त्या देहाचे तुकडे केले आणि ज्या ज्या स्थळी अवयव/दागिने/रक्ताचे थेंब पडले,
तेथे पवित्र शक्तीस्थाने निर्माण झाली. या स्थानांना शक्तीपीठे म्हणतात. प्रत्येक शक्तीपीठाशी एक विशिष्ट
देवीरूप (शक्ती) आणि एक भैरवरूप जोडलेले आहे.
शक्तीपीठांचे महत्त्व
- प्रत्येक शक्तीपीठ देवीच्या एका अंगाचे प्रतीक मानले जाते.
- येथे शक्ती आणि भैरव यांची एकत्र उपासना केली जाते.
- अध्यात्म, तंत्रसाधना आणि भक्तीसाठी ही स्थळे अत्यंत पवित्र मानली जातात.
५१ शक्तीपीठांची यादी (देवी, भैरव, अवयव आणि ठिकाण)
| क्र. | शक्तीपीठ (देवी) | भैरव | सतीचा अवयव / दागिना | ठिकाण (राज्य / देश) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | कामाख्या | उमानंद | योनिभाग | गुवाहाटी, आसाम |
| 2 | त्रिपुरसुंदरी | त्रिपुरांतक | उजवे पाऊल | उदयपूर, त्रिपुरा |
| 3 | सुंदरी (शोनितपूर) | सुन्दरानंद | नाक | आसाम |
| 4 | जया दुर्गा | क्षीरकंठक | डोळा | कोलकाता, पश्चिम बंगाल |
| 5 | वज्रेश्वरी | रुद्र | मनकंठ | गंधक, बिहार |
| 6 | महालक्ष्मी | कुरुंदर | डोळा | कोल्हापूर, महाराष्ट्र |
| 7 | महाकाली | महाकाल | वरचे ओठ | उज्जैन, मध्य प्रदेश |
| 8 | सर्वमंगला | दैत्यारि | दात | गौरीपूर, ओडिशा |
| 9 | महेश्वरी | बटुक | हृदय | अंबाजी, गुजरात |
| 10 | चामुंडेश्वरी | कपाल | केस | मैसूर, कर्नाटक |
| 11 | भीमेश्वरी | भीमलोचन | डावा पाय | पिथौरागढ, उत्तराखंड |
| 12 | अंबिका | वामन | दोन्ही हात | भुवनेश्वर, ओडिशा |
| 13 | शृंगी देवी | रसन | नाक | हिमाचल प्रदेश |
| 14 | ज्वाला देवी | उन्नत | जीभ | कांगडा, हिमाचल प्रदेश |
| 15 | वैष्णवी | कालभैरव | हाताचे तळवे | जम्मू (वैष्णोदेवी) |
| 16 | हरसिद्धी | कपिल | कोपर | उज्जैन, मध्य प्रदेश |
| 17 | महाशक्ती | चंद्रशेखर | डावा स्तन | चंडीगड |
| 18 | कालीघाट | नकुलेश | उजवा पायाचा बोट | कोलकाता, पश्चिम बंगाल |
| 19 | तारा (तारापीठ) | अक्षय कुमार | तिसरे डोळे | बीरभूम, पश्चिम बंगाल |
| 20 | नंदिनी | जगन्नाथ | उजवे गाल | गंगा सागर, पश्चिम बंगाल |
| 21 | कन्याकुमारी | संदीपान | पाठीचा हाडाचा भाग | कन्याकुमारी, तामिळनाडू |
| 22 | कामरुपेश्वरी | उमानंद | योनिभाग | आसाम |
| 23 | गिरिजा | त्र्यक्ष | नाभी | गया, बिहार |
| 24 | विंध्यवासिनी | रत्नेश्वर | पाऊल | विंध्याचल, उत्तर प्रदेश |
| 25 | रत्नेश्वरी | शंकर | उजवे मांड | राजस्थान |
| 26 | ललिता | भैरव | दात | प्रयागराज, उत्तर प्रदेश |
| 27 | अन्नपूर्णा | कालभैरव | डावा हात | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| 28 | भद्रकाली | अमरनाथ | डावा खांदा | कुरुक्षेत्र, हरियाणा |
| 29 | त्रिपुरसुंदरी (बासर) | दंडपाणि | उजवा खांदा | तेलंगणा |
| 30 | दुर्गा (मुंगेर) | रुद्र | उजवे कान | बिहार |
| 31 | भीमा (कांची) | शंकर | पाऊल | कांची, तामिळनाडू |
| 32 | मनसा | शिव | उजवा हात | हरिद्वार, उत्तराखंड |
| 33 | चंडी | चंद्रभैरव | डावा हात | हरिद्वार, उत्तराखंड |
| 34 | जोगुलाम्बा | राजा रंजार | दात | अलंकारपूर, तेलंगणा |
| 35 | एकवीरा | महामुनीश्वर | उजवी कोपर | कार्ला, महाराष्ट्र |
| 36 | रेणुका | एकविरा | मान | महूर, महाराष्ट्र |
| 37 | तुलजाभवानी | वेधशक्तीश | डावा हात | तुलजापूर, महाराष्ट्र |
| 38 | सप्तशृंगी | कालभैरव | उजवा हात | नाशिक, महाराष्ट्र |
| 39 | भवानी (वायगाव) | लांबोदर | भुवयांमधील भाग | महाराष्ट्र |
| 40 | महालक्ष्मी (श्रीनगर) | पुरुषोत्तम | डावा पाय | श्रीनगर, जम्मू-काश्मीर |
| 41 | भवानी (कांचीपुरम) | शंकर | उजवे स्तन | कांचीपुरम, तामिळनाडू |
| 42 | दुर्गा (पटना) | शिव | उजवे हात | पटना, बिहार |
| 43 | हिंगलाज माता | भीमलोचन | ब्रह्मरंध्र | बलुचिस्तान, पाकिस्तान |
| 44 | सुंदरी (सिल्हेट) | इशान | मान | सिल्हेट, बांगलादेश |
| 45 | धूमावती | कालभैरव | डावा दात | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| 46 | बगलामुखी | महारुद्र | जीभेचा टोक | दतिया, मध्य प्रदेश |
| 47 | छिन्नमस्ता | कृष्ण | मस्तक | राजरप्पा, झारखंड |
| 48 | मातंगी | कपिलेश्वर | डावा हात | ओडिशा |
| 49 | तारा तरिणी | हयग्रीव | स्तन | ओडिशा |
| 50 | जय दुर्गा | विक्रांत | डावा पाय | बांगलादेश |
| 51 | कामेश्वरी | उमानंद | गळा | आसाम |
निष्कर्ष
ही ५१ शक्तीपीठे केवळ धार्मिक स्थळे नाहीत तर भक्ती, श्रद्धा, अध्यात्म आणि शक्तीची अखंड परंपरा आहेत.
सर्व शक्तीपीठांचे दर्शन म्हणजे आदिशक्तीच्या पूर्ण कृपेचा अनुभव मानला जातो.
